What is man in the middle attack || network sniffing से जुडी पूरी जानकारी हिन्दी में – 2020

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What is man in the middle attack
What is man in the middle attack
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What is man in the middle attack : भारत में आज जब सभी isp प्रोवाइडर कम्पनियाँ data बहुत कम दामों में दे रही है, तब भी कुछ लोग ऐसे है उन्हें जहाँ भी खुला हुआ wifi मिल जाता है तो उसे भंडारा समझ कर उस पर टूट पढ़ते है कहीं भी और कभी भी मुफ्त में wifi की सुविधा का लाभ उठाने के लिए तैयार रहते है| 

अगर आप भी इन्ही लोगों में से है तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट और जानकारी से भरपूर होने वाली है जिसमें मैं आपको network sniffing के बारे में और What is man in the middle attack समझाऊंगा| 
ज्यादातर लोग किसी भी फ्री wifi से अपना कंप्यूटर लैपटॉप को कनेक्ट करने के बाद अपना काम करने लगते है, अगर आप भी इसी प्रकार काम करते है तो आप आज के इस पोस्ट को पढ़ने के बाद इस तरह की गलती जीवन में दुबारा नहीं करेंगे |
मुझे पता है की आप में से जो लोग कंप्यूटर साइंस से सम्बन्ध नहीं रखते है उन्हें शायद कुछ समझ नहीं आ रहा होगा की में क्या बात कर रहा हूँ, और फ्री में वाईफाई उपयोग करने से क्यों मना कर रहा हूँ, चलिए जान लेते है की मैं ऐसे क्यों कह रहा हूँ |
 
जब भी हम किसी थर्ड पार्टी या फ्री वाईफाई का उपयोग करते है तो जिस भी व्यक्ति द्वारा यह वाईफाई मुफ्त में दिया जा रहा है अगर वह चाहे तो वह उन सभी लोगों की इंटरनेट पर हो रही गतिविधियों को बीच में ही पढ़ सकता है जो उसके फ्री wifi network से कनेक्टेड है, और अगर चाहे तो उस data को store करके भी रख सकता है |
 
क्योंकि हम सभी इंटरनेट पर ना जाने कितनी ही वेबसाइट पर विजिट करते है और वहां पर हम ना जाने कितने सेंसटिव जानकारी जैसे की – credit, डेबिट कार्ड, या इंटरनेट बैंकिंग id और पासवर्ड एवं अन्य कई ऐसे जानकारी होती जिसे आप नहीं चाहते है की लोग उसके बारे में जाने | और इस तरह के कार्य को हम network sniffing या man in the middle attack के नाम से जानते है | चलिए इसे एक एक्साम्प्ले के माध्यम से समझते है |

What is man in the middle attack?

What is man in the middle attack
What is man in the middle attack
मान लीजिए की satya नाम का हैकर है और जिसको लोगों के data को चुराने और उसके क्रेडेंशियल जानकारी (credit /debit card Details) को चुराना अच्छा लगता है . उसके लिए वह एक रेस्ट्रोरेन्ट जाता है और एक कॉफी खरीदता है और उसी जगह पर एक table पर बैठ कर अपना wi-fi का को open कर देता है रेस्ट्रोरेन्ट के wifi के नाम से और वह इसके बाद वह अपनी कॉफी कर मजा लेना लगता है |
अब जितने भी लोग उस रेस्ट्रोरेन्ट में आयेंगे और उस रेस्ट्रोरेंट के फ्री wifi कर उपयोग करेंगे, चूँकि उस हैकर नए भी रेस्ट्रोरेंट के नाम से अपना hotspot कर नाम रखा है, अब जितने भी उस हैकर के hotspot से कनेक्ट होंगे, उन सभी लोगों के data ट्रांसफर को वह हैकर network sniffer tool के माध्यम से देख सकता है और कैप्चर कर सकता है |
 और मानलो ऐसे में एक व्यक्ति आता है और उसी network से कनेक्ट होकर किसी शॉपिंग site पर जाता है जिसमें https के स्थान पर http है और वहां जाकर वह अगर अपने credit कार्ड details डालता है और एक प्रोडक्ट order करता है और वहां से चला जाता है |
 
अब इस बीच उनसे जो भी किया वह सब कुछ उस हैकर के कंप्यूटर में कैप्चर हो गया और उसके credit कार्ड की details भी उस हैकर के पास चली गई, अब हैकर चाहे उस तरह से उसका उपयोग कर सकता है |
 
यह सिर्फ एक्साम्प्ले है man in the middle या network sniffing का हालंकि हम इस attack से बहुत कुछ कर सकते है |
 
Note : इसीलिए कभी किसी भी फ्री network कर उपयोग करें, और किसी भी ऐसी वेबसाइट जिस पर https enable ना उसपर अपने जानकारी भी fill उप ना करें| इसी तरह से sniffing की घटना से बचा जा सकता है |
Network sniffing दो तरह की होती है| 

Active sniffing – 

जब किसी switch network में sniffing की घटना होती है तो इसे हम active sniffing कहते है | switch एक नेटवर्किंग डिवाइस और इसके बारे में पहले अपने कुछ आर्टिकल में बहुत कुछ बता चूका हूँ तो आप उसे पढ़ सकते है 

Passive sniffing –

जब भी किसी hub network में sniffing की घटना होती है तो उसे हम passive sniffing कहते है चूँकि switch की तुलना में hub में sniffing के काम को अंजाम देना बेहद आसान होता है 

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आपको इस पोस्ट में साझा की गई जानकारी जरूर पसंद आई होगी, अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करेंगे, और कमेंट कर बताये की आपको यह पोस्ट कैसी लगी |

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